मूवी रिव्यू, चंदू चैंपियन: कार्तिक आर्यन पर्दे पर चैंपियन बनकर उभरे; करियर की सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस, कहानी प्रेरणादायक, निर्देशन भी अच्छा; बस लंबाई आपको परेशान कर सकती है

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मूवी रिव्यू, चंदू चैंपियन: कार्तिक आर्यन पर्दे पर चैंपियन बनकर उभरे; करियर की सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस, कहानी प्रेरणादायक, निर्देशन भी अच्छा; बस लंबाई आपको परेशान कर सकती है

मुंबई3 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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कार्तिक आर्यन की फिल्म चंदू चैंपियन आज (14 जून) सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह फिल्म देश के पहले पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर के जीवन पर आधारित है। 2 घंटे 23 मिनट लंबी इस फिल्म को दैनिक भास्कर ने 5 में से 4 स्टार की रेटिंग दी है।

फिल्म की कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी 1950 के दशक से शुरू होती है। महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में मुरलीकांत पेटकर नाम का एक लड़का पैदा होता है। बचपन से ही उसका एक ही सपना होता है – ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतना। वह दारा सिंह का फैन है, इसलिए कुश्ती शुरू कर देता है। हालांकि, उसके परिवार को मुरली की कुश्ती पसंद नहीं है। गांव के कुछ संभ्रांत लोग भी मुरली को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते।

मुरलीकांत गांव से भाग जाता है। भागते-भागते वह एक ट्रेन में चढ़ जाता है। उस ट्रेन में मुरली की मुलाकात करनैल सिंह नाम के एक शख्स से होती है, जो सेना में भर्ती होने वाला है। वह मुरली को सलाह देता है कि अगर उसे ओलंपिक में जाना है तो उसे पहले सेना में भर्ती होना चाहिए। मुरली उसकी सलाह मान लेता है और सेना में भर्ती हो जाता है। कुछ समय बाद उसे पता चलता है कि ओलंपिक में कुश्ती जैसा कोई खेल नहीं है, इसलिए वह इसी तरह की प्रतियोगिता बॉक्सिंग पर ध्यान केंद्रित करता है। मुरलीकांत अली सर (विजय राज) के अधीन प्रशिक्षण लेना शुरू कर देता है। मुरली की सफलता में यही अली सर सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

इस बीच मुरलीकांत, करनैल सिंह और अली सर कश्मीर में तैनात हैं। यहां से सबकुछ बदल जाता है। पाकिस्तानी सेना अचानक हमला कर देती है। इस युद्ध में मुरलीकांत को 9 गोलियां लगती हैं, फिर भी वह बच जाता है। हालांकि, ओलंपिक में जाने का उसका सपना अधूरा लगता है, क्योंकि उसका आधा शरीर लकवाग्रस्त हो जाता है।

इस बीच मुरलीकांत की मुलाक़ात अली सर से फिर होती है। अली सर एक बार फिर मुरली में उम्मीद जगाते हैं। बॉक्सिंग नहीं तो तैराकी में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए मुरलीकांत को प्रोत्साहित करते हैं। इस तरह मुरलीकांत पेटकर भारत की तरफ़ से पैरालिंपिक में हिस्सा लेने जाते हैं। हालांकि, वहां भी उनका सफ़र आसान नहीं होता। आगे क्या होता है, यह जानने के लिए आपको फ़िल्म देखनी होगी।

कार्तिक आर्यन ने फिल्म में मुरलीकांत पेटकर की भूमिका निभाई है।

कार्तिक आर्यन ने फिल्म में मुरलीकांत पेटकर की भूमिका निभाई है।

स्टार कास्ट की एक्टिंग कैसी है?
हमेशा कॉमिक और रोमांटिक रोल निभाने वाले कार्तिक आर्यन पहली बार किसी बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म में नजर आए हैं। मुरलीकांत पेटकर के रोल में उनकी मेहनत साफ नजर आ रही है। फिल्म में उनके एक्सप्रेशन और बॉडी लैंग्वेज कमाल के हैं।

अगर हम कहें कि यह कार्तिक के करियर की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस है तो गलत नहीं होगा। कार्तिक के अलावा इस फिल्म में जिस शख्स ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है वो हैं विजय राज। एक सख्त ट्रेनर के रोल में वो कमाल के लगे हैं। मुरलीकांत के दोस्त करनैल सिंह के रोल में भुवन अरोड़ा का काम भी शानदार है। ये वही भुवन अरोड़ा हैं जो वेब सीरीज ‘फर्जी’ में शाहिद कपूर के दोस्त के रोल में नजर आए थे। फिल्म में राजपाल यादव और यशपाल शर्मा भी हैं। दोनों ही अपने रोल में परफेक्ट हैं।

मूवी रिव्यू, चंदू चैंपियन: कार्तिक आर्यन पर्दे पर चैंपियन बनकर उभरे; करियर की सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस, कहानी प्रेरणादायक, निर्देशन भी अच्छा; बस लंबाई आपको परेशान कर सकती है

फिल्म का निर्देशन कैसा है?
एक था टाइगर और बजरंगी भाईजान जैसी फ़िल्में बना चुके कबीर खान ने इसे डायरेक्ट किया है। उन्होंने कहानी को काफ़ी रोचक बनाए रखने की कोशिश की है। उन्होंने युद्ध और बॉक्सिंग रिंग के सीक्वेंस को बहुत अच्छे से दिखाया है।

सिनेमेटोग्राफी भी काबिले तारीफ है। 50-60 साल पहले देश कैसा रहा होगा, यह पर्दे पर दिखाने में वे सफल रहे हैं। हां, फिल्म की लंबाई कुछ लोगों को परेशान कर सकती है। कुछ लोग इसे धीमी भी कह सकते हैं।

कबीर खान (दाएं) ने फिल्म का निर्देशन किया है।

कबीर खान (दाएं) ने फिल्म का निर्देशन किया है।

फिल्म का संगीत कैसा है?
फिल्म के गाने हर सीक्वेंस के लिए उपयुक्त हैं। वे कानों को परेशान नहीं करेंगे। हालांकि, वे इतने अच्छे नहीं हैं कि उन्हें याद रखा जाए या फिर दोबारा सुना जाए।

अंतिम निर्णय, देखें या नहीं?
इसमें कोई शक नहीं है कि यह फिल्म आपको प्रेरित करेगी। जब आप सिनेमाघर से बाहर निकलेंगे तो आपके मन में कुछ पाने की चाहत होगी। यह फिल्म एक ऐसे शख्स की कहानी है जो इतिहास के पन्नों में कहीं खो गया।

फिल्म के जरिए आपको उस शख्स की गौरवशाली कहानी जानने का मौका मिलेगा। अगर आप ऐसी गंभीर फिल्मों के शौकीन हैं तो आप थिएटर जरूर जा सकते हैं। इसके अलावा अगर आप कार्तिक के फैन हैं तो आप आंख बंद करके जा सकते हैं।